समुद्र मंथन योजना (आधिकारिक नाम: National Offshore Exploration Scheme) भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) की महत्वाकांक्षी योजना है। 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूरी दी। इसका कुल बजट ₹84,084 करोड़ है और इसे वित्त वर्ष 2030–31 तक लागू किया जाएगा।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्रों में गहरे (Deepwater) और अति-गहरे (Ultra-Deepwater) क्षेत्रों में तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देना, ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
- भारत में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना।
- कच्चे तेल और एलएनजी के आयात पर निर्भरता कम करना।
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना।
- निजी और सरकारी कंपनियों को अपतटीय अन्वेषण के लिए प्रोत्साहित करना।
- नई तकनीक और निवेश को बढ़ावा देना।
समुद्र मंथन योजना से भारत को क्या लाभ होगा?
भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल (Crude Oil) और करीब 50% प्राकृतिक गैस की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में समुद्र मंथन योजना का मुख्य उद्देश्य देश में समुद्र के नीचे नए तेल और गैस भंडार खोजकर इस निर्भरता को कम करना है।
1. आयात पर निर्भरता कम होगी
- यदि नए तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो भारत को विदेशों से कम तेल खरीदना पड़ेगा।
- इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
2. ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
- अंतरराष्ट्रीय युद्ध, संकट या तेल उत्पादक देशों की आपूर्ति में कमी का भारत पर कम असर पड़ेगा।
- देश के पास अपने ऊर्जा संसाधन उपलब्ध होंगे।
3. पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सकारात्मक असर
- घरेलू उत्पादन बढ़ने से लंबे समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
- हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स और अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं, इसलिए तुरंत कीमतें कम होना तय नहीं है।
4. रोजगार के नए अवसर
- ऑफशोर ड्रिलिंग, इंजीनियरिंग, पाइपलाइन, जहाज निर्माण और तेल-गैस उद्योग में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
5. अर्थव्यवस्था को मजबूती
- आयात बिल कम होने से व्यापार घाटा (Trade Deficit) घट सकता है।
- सरकार के राजस्व और निवेश में वृद्धि हो सकती है।
- उद्योगों को ऊर्जा की अधिक स्थिर आपूर्ति मिलेगी।
6. निजी और विदेशी निवेश बढ़ेगा
- सरकार ड्रिलिंग लागत का 50% तक वहन करेगी, जिससे निजी और विदेशी कंपनियां गहरे समुद्री क्षेत्रों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
7. आधुनिक तकनीक का विकास
- डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ड्रिलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का विकास होगा।
- भारत की तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता बढ़ेगी।
8. मेक इन इंडिया को बढ़ावा
- ₹2,000 करोड़ की ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विसेज ज़ोन से घरेलू उपकरण निर्माण और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
9. रणनीतिक लाभ
- समुद्री क्षेत्रों में भारत की उपस्थिति और क्षमता मजबूत होगी।
- ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ने से राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
क्या यह योजना तुरंत लाभ देगी?
नहीं। समुद्र में तेल और गैस की खोज, ड्रिलिंग और उत्पादन में कई वर्ष लगते हैं। यदि व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार मिलते हैं, तो इसका बड़ा लाभ 2030–31 और उसके बाद देखने को मिल सकता है।
