यह बंद कौमी इंसाफ मोर्चा और अन्य समर्थक संगठनों के आह्वान पर सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया।
मुख्य मांगें
- लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों, जिन्हें समर्थक संगठन “बंदी सिंह” कहते हैं, की रिहाई।
- जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की मांग।
- अमृतपाल सिंह खालसा सहित अन्य सिख नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने/रिहाई की मांग भी कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों ने उठाई।
- 15 अगस्त को चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प तथा पुलिस कार्रवाई के विरोध को भी बंद की वजह बताया गया।
आज बंद का असर पंजाब के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग रहा—कई जगह बाजार और परिवहन प्रभावित हुए तथा कुछ निजी स्कूल बंद रहे।
1. “बंदी सिंह” किन कारणों से जेल में हैं?
“बंदी सिंह” कोई एक व्यक्ति नहीं है। इस शब्द का इस्तेमाल उन अलग-अलग सिख कैदियों के लिए किया जाता है जो पंजाब में उग्रवाद के दौर से जुड़े विभिन्न आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए या लंबे समय से जेल में हैं। उदाहरण के तौर पर:
- बलवंत सिंह राजोआना — पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी हैं।
- देविंदरपाल सिंह भुल्लर — 1993 दिल्ली बम विस्फोट मामले में सजा काट रहे हैं।
- आंदोलनकारियों का कहना है कि कुछ कैदी अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं, फिर भी रिहा नहीं हुए; इसी मुद्दे पर रिहाई की मांग की जा रही है।
2. जगतार सिंह हवारा को क्यों जेल हुई?
जगतार सिंह हवारा को 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या और उससे जुड़े आपराधिक षड्यंत्र के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्हें पहले मौत की सजा दी गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। 2026 में उनकी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल की मांग को लेकर भी मामला अदालत में गया था।
3. अमृतपाल सिंह को क्यों हिरासत में रखा गया?
अमृतपाल सिंह को 2023 में National Security Act (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में आरोप लगे, जिनमें:
- अपहरण और मारपीट का मामला,
- अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुई हिंसा से जुड़ा मामला, जिसमें हत्या के प्रयास सहित आरोप लगाए गए,
- हथियार कानून और अन्य आपराधिक धाराओं से जुड़े मामले,
- पुलिस के अनुसार भड़काऊ भाषण और सार्वजनिक शांति/कानून-व्यवस्था के लिए खतरे की आशंका।
इन मामलों और NSA हिरासत के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी चलती रही है। आरोप और दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी बातें हैं, इसलिए अमृतपाल सिंह के मामले में हर आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध अपराध कहना सही नहीं होगा जब तक संबंधित अदालत में फैसला न हो।
संक्षेप में: पंजाब बंद की मांग मुख्यतः इन कैदियों की रिहाई या पैरोल से जुड़ी है, लेकिन जिन व्यक्तियों का नाम लिया जा रहा है, वे अलग-अलग मामलों और कानूनी परिस्थितियों के कारण जेल या हिरासत में हैं।
