पिछले कुछ दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। इसी बीच अमेरिका की ओर से हॉरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर कड़े संदेश सामने आए हैं। भारत के विदेश मंत्री और अमेरिकी अधिकारियों के बीच भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई है।
सवाल यह है कि हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में चल रहा यह तनाव भारत के आम नागरिक को क्यों प्रभावित कर सकता है?
आखिर हॉरमुज़ इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से एशिया और दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए हॉरमुज़ में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
यह केवल तेल की कहानी नहीं है
अक्सर लोग सोचते हैं कि तेल महंगा होगा तो केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होगा।
असल तस्वीर इससे कहीं बड़ी है।
यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो:
ट्रांसपोर्ट महंगा होता है
खाद्य वस्तुओं की लागत बढ़ती है
हवाई यात्रा महंगी होती है
उद्योगों का खर्च बढ़ता है
महंगाई पर दबाव बढ़ता है
भारत की खुदरा महंगाई में हाल ही में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और विशेषज्ञ पहले से ही खाद्य तथा ईंधन लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं।
क्या भारत तैयार है?
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाए हैं और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है।
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है और समुद्री व्यापार प्रभावित होता है, तो पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।
असली खतरा तेल नहीं, अनिश्चितता है
बाजारों को सबसे ज्यादा डर युद्ध से नहीं, बल्कि अनिश्चितता से लगता है।
जब निवेशकों को यह समझ नहीं आता कि अगला कदम क्या होगा, तब:
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है
विदेशी निवेश प्रभावित होता है
मुद्रा पर दबाव आता है
व्यापारिक निर्णय धीमे पड़ जाते हैं
यही कारण है कि दुनिया भर के निवेशक इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं।
भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
- महंगाई का दबाव
यदि तेल महंगा होता है तो खाद्य और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकती हैं।
- आर्थिक विकास की रफ्तार
उद्योगों की लागत बढ़ने से विकास दर प्रभावित हो सकती है।
- ऊर्जा सुरक्षा
लंबे समय तक संकट रहने पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की आवश्यकता बढ़ सकती है।
आने वाले 30 दिन क्यों महत्वपूर्ण हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि स्थिति केवल कूटनीतिक तनाव तक सीमित रहती है या वैश्विक आर्थिक संकट का रूप लेती है।
यदि समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ता है तो तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
