भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौता: पीएम मोदी की यात्रा में क्या हुआ, भारत को क्या फायदा होगा?

ndia-australia-uranium-export-deal-pm-modi-visit-benefits-explained ndia-australia-uranium-export-deal-pm-modi-visit-benefits-explained

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy) के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम निर्यात करने पर महत्वपूर्ण समझौता हुआ। यह समझौता दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देता है। यह 2014 के सिविल न्यूक्लियर समझौते को व्यावसायिक स्तर पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यूरेनियम क्या होता है?

यूरेनियम (Uranium) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेडियोधर्मी (Radioactive) रासायनिक तत्व है। यह पृथ्वी की चट्टानों, मिट्टी और कुछ खनिजों में पाया जाता है। इसका रासायनिक प्रतीक U (यू) और परमाणु क्रमांक 92 है। यूरेनियम बहुत भारी धातु (Heavy Metal) है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके परमाणु का विखंडन (Nuclear Fission) करके अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। यही कारण है कि इसे परमाणु ऊर्जा उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण ईंधन माना जाता है।

यूरेनियम की खोज वर्ष 1789 में जर्मन रसायनशास्त्री मार्टिन हेनरिक क्लापरोथ (Martin Heinrich Klaproth) ने की थी। उन्होंने इसका नाम उस समय खोजे गए ग्रह यूरेनस (Uranus) के नाम पर रखा था। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि यूरेनियम में रेडियोधर्मिता (Radioactivity) होती है, जिसके कारण यह परमाणु ऊर्जा उत्पादन में अत्यंत उपयोगी साबित हुआ।

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौता क्या है?

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौता एक महत्वपूर्ण असैन्य (Civil Nuclear) परमाणु सहयोग समझौता है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। इस यूरेनियम का उपयोग केवल भारत के परमाणु बिजली संयंत्रों (Nuclear Power Plants) में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। इसका उपयोग किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार बनाने में नहीं किया जा सकता। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत लागू किया जाएगा।

इस सहयोग की नींव वर्ष 2014 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए Civil Nuclear Cooperation Agreement से पड़ी थी। इसके बाद दोनों देशों ने तकनीकी, कानूनी और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा किया। वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

यह समझौता भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में यूरेनियम के सीमित भंडार हैं, जबकि बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में से एक है, इसलिए यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंध भी और अधिक मजबूत होंगे।

ऑस्ट्रेलिया ही क्यों?

ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए यूरेनियम का एक आदर्श साझेदार है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है और उच्च गुणवत्ता वाला यूरेनियम निर्यात करता है। यह एक स्थिर लोकतांत्रिक देश, विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार और भारत का रणनीतिक सहयोगी है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों QUAD (Quad) समूह के सदस्य हैं तथा हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करते हैं। ऑस्ट्रेलिया की उन्नत खनन तकनीक, पारदर्शी नीतियां और दीर्घकालिक आपूर्ति क्षमता भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हैं। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

यूरेनियम से बिजली कैसे बनती है?

यूरेनियम से बिजली नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया द्वारा बनाई जाती है। सबसे पहले यूरेनियम अयस्क (Uranium Ore) को खदानों से निकालकर शुद्ध किया जाता है और उससे छोटे-छोटे ईंधन पेलेट (Fuel Pellets) तैयार किए जाते हैं। इन पेलेट्स को धातु की लंबी नलियों में भरकर फ्यूल रॉड (Fuel Rods) बनाया जाता है, जिन्हें परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactor) में स्थापित किया जाता है।

रिएक्टर के अंदर जब यूरेनियम-235 (U-235) के परमाणु पर न्यूट्रॉन टकराता है, तो उसका नाभिक टूट जाता है। इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं। नाभिक के टूटने से अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा (Heat Energy) और नए न्यूट्रॉन निकलते हैं, जो आगे अन्य यूरेनियम परमाणुओं को तोड़ते हैं। इसे श्रृंखलाबद्ध अभिक्रिया (Chain Reaction) कहा जाता है।

उत्पन्न ऊष्मा से रिएक्टर में मौजूद पानी गर्म होकर उच्च दबाव वाली भाप (Steam) में बदल जाता है। यह भाप तेज गति से टर्बाइन (Turbine) को घुमाती है। टर्बाइन से जुड़ा जनरेटर (Generator) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा (Electricity) में परिवर्तित कर देता है। इसके बाद भाप को ठंडा करके फिर से पानी बनाया जाता है और दोबारा उपयोग में लाया जाता है।

यूरेनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी बहुत कम मात्रा से अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही कारण है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र 24×7 लगातार बिजली उत्पादन करने में सक्षम होते हैं और कोयले की तुलना में बहुत कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। इसलिए यूरेनियम को स्वच्छ, विश्वसनीय और दीर्घकालिक ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *